मिस्र की संसद ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता की मंज़ूरी दी
मिस्री सांसदों ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने की मंज़ूरी दी है, जिसे अधिकारी रक्षात्मक बता रहे हैं, जबकि रियाद और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच हमलों का आदान-प्रदान जारी है।

काहिरा — मिस्र की संसद ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने की मंज़ूरी दे दी है। राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह अल-सीसी की सरकार इस क़दम को अपने निकट सहयोगी देश की भूमि की रक्षा की प्रतिबद्धता बता रही है, जबकि यह राज्य यमन में ईरान-समर्थित हूती आंदोलन के साथ लगातार घातक होते हमलों का आदान-प्रदान कर रहा है।
सांसदों ने सोमवार को काहिरा के पूर्व में स्थित नई प्रशासनिक राजधानी के संसद भवन में मतदान किया, CNA के अनुसार। किसी भी मिस्री बल के आकार, संरचना और तैनाती का खुलासा नहीं किया गया है, और अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि सैनिक कब या कहाँ भेजे जा सकते हैं।
"हम राज्य की भूमि और सीमाओं की रक्षा की बात कर रहे हैं," मिस्र के राष्ट्रपति अब्दुल फ़त्ताह अल-सीसी ने कहा।
अधिकारियों ने कहा है कि मिस्री बलों को केवल रक्षात्मक उद्देश्यों के लिए प्रतिबद्ध किया जाएगा, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया। यह शब्दावली सऊदी धरती की रक्षा पर काहिरा के सार्वजनिक ज़ोर को दोहराती है, न कि यमन में आक्रामक अभियानों में शामिल होने को। CNA ने मिस्र के पहले के रुख को, गहरी भागीदारी के संदर्भ में, "हिचकिचाहट" वाला बताया।
यह मंज़ूरी सऊदी अरब और यमन में ईरान-समर्थित मिलिशिया हूती के बीच सीमा-पार हमलों की पृष्ठभूमि में आई है। टाइम्स ने इन आदान-प्रदानों को लगातार घातक बताया, हालाँकि दोनों में से किसी भी स्रोत ने नवीनतम लड़ाई के हताहतों के आंकड़े नहीं दिए, और हाल के हमलों के पैमाने की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं हो सकी।
मिस्र और सऊदी अरब निकट सहयोगी हैं, और यह मतदान उस रक्षात्मक दायित्व को औपचारिक रूप देता है जिसे काहिरा राज्य के प्रति अपना कर्तव्य बताता है। रियाद आगे क्या चाहता है, और मिस्री भागीदारी वास्तव में कितनी दूर तक जाएगी, यह अब भी स्पष्ट नहीं है। फ़िलहाल, दोनों राजधानियों के अधिकारी केवल इतना कह रहे हैं कि यह अभियान सऊदी क्षेत्र की रक्षा के लिए है, और मिस्री व सऊदी नागरिक यह जानने का इंतज़ार कर रहे हैं कि व्यवहार में इस तैनाती का क्या अर्थ होगा।
स्रोत
यह लेख इन रिपोर्टों पर आधारित है:


