इज़राइल: चुनाव नतीजे प्रमाणित, नेतन्याहू के धांधली दावे खारिज
इज़राइल के केंद्रीय चुनाव आयोग ने 9,069 मतदान केंद्रों की जाँच में धोखाधड़ी नहीं पाई, जिससे अरब-नेतृत्व वाले दलों के सहारे आइज़ेनकोट के सत्ता तक पहुँचने का रास्ता खुला।

येरुशलम — इज़राइल के चुनावी अधिकारियों ने बुधवार को 27 अक्टूबर के चुनाव के नतीजों को प्रमाणित कर दिया और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा प्रचारित धांधली के आरोपों को खारिज कर दिया। इसके साथ ही राष्ट्रपति आइज़ैक हर्ज़ोग पर यह फ़ैसला करने की ज़िम्मेदारी आ गई है कि सरकार बनाने का पहला मौका किसे मिले। केंद्रीय चुनाव आयोग ने कहा कि उसने 9,069 मतदान केंद्रों की जाँच की है और उसे भरोसा है कि नतीजे “मतदाताओं की इच्छा को सटीक रूप से दर्शाते हैं”।
“राजनीतिक दलों द्वारा दायर सभी शिकायतों की समीक्षा कर ली गई है और चुनाव की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचाने वाला कोई भी निष्कर्ष नहीं मिला है,” आयोग ने कहा। Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग के पाँच सदस्यीय प्रेसिडियम में येश अतीद और ब्लू एंड व्हाइट के प्रतिनिधियों ने नतीजों की पुष्टि के पक्ष में मतदान किया, जबकि लिकुड और शास ने मतदान से परहेज़ किया। अध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति नोआम सोहलबर्ग ने निर्णायक वोट डाला।
नेतन्याहू और उनके सहयोगी बिना सबूत के बार-बार दावा करते रहे हैं कि अरब-नेतृत्व वाले दलों ने चुनाव “चुरा” लिया, और संभव है कि इसमें विदेशी मदद भी रही हो। न्यायमूर्ति सोहलबर्ग ने कहा कि नतीजों पर संदेह जताने वाले लोग इज़राइल के लोकतंत्र के लिए “वास्तविक खतरा” हैं।
गणित आसान रास्ता नहीं छोड़ता। प्रमाणित आँकड़ों के अनुसार नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलीं और गादी आइज़ेनकोट के विपक्षी गठबंधन को 48, जबकि अरब-नेतृत्व वाले दल रा'अम और जॉइंट लिस्ट ने रिकॉर्ड 19 सीटें जीतीं। 120 सीटों वाली क्नेसेट में बहुमत के लिए ज़रूरी 61 सीटों तक दोनों में से कोई भी पक्ष नहीं पहुँचता। पूर्व सैन्य प्रमुख आइज़ेनकोट अरब दलों के समर्थन से यह आँकड़ा छू सकते हैं, लेकिन विपक्ष के कुछ नेता गैर-यहूदी सांसदों के वोटों पर निर्भर होने से हिचक रहे हैं। उन्होंने लिकुड पर “लोकतंत्र पर सुनियोजित हमले” का आरोप लगाया है, The Hindu की रिपोर्ट के अनुसार।
विवाद सुरक्षा एजेंसियों तक भी पहुँच गया है। शिन बेट ने समिति को बताया कि खुफ़िया जानकारी विदेशी फंडिंग और प्रभाव अभियानों की ओर इशारा करती है, जिसमें “हज़ारों लोग और शायद उससे भी ज़्यादा” शामिल हैं, ऐसा द टाइम्स ऑफ इज़राइल ने बताया। हालाँकि, कानून प्रवर्तन सूत्रों ने हारेट्ज़ को बताया कि उन्हें इतने बड़े किसी अभियान की जानकारी नहीं है। अटॉर्नी जनरल गली बहारव-मीरा ने कहा कि वे बिना सबूत किसी से पूछताछ नहीं करेंगी। लिकुड ने आरोप लगाया कि वे “जाँच में बाधा डाल रही हैं और विदेशी तत्वों द्वारा चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर के इस गंभीर मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही हैं।”
इज़राइल में 2019 से 2022 के बीच बार-बार गतिरोध के बाद पाँच चुनाव हुए, और नवंबर 2022 के आखिरी चुनाव के बाद नेतन्याहू को सरकार बनाने में 58 दिन लगे। उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, और पद छोड़ने पर उनकी कानूनी छूट खत्म हो सकती है। “नई सोच” की ज़रूरत पर ज़ोर दे चुके हर्ज़ोग अब दो दिन की परामर्श प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं, जिसकी शुरुआत छोटे दलों से होगी।
एक बार हर्ज़ोग किसी उम्मीदवार का नाम तय कर देंगे, तो उस व्यक्ति के पास गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन होंगे, जिन्हें 14 दिन तक बढ़ाया जा सकता है। अगर सारे प्रयास विफल होते हैं, तो इज़राइली अगले साल की शुरुआत में फिर से मतदान केंद्रों पर लौट सकते हैं, जो नतीजा हर्ज़ोग और दोनों पक्षों के दल प्रमुखों के लिए टालने लायक है।
स्रोत
यह लेख इन रिपोर्टों पर आधारित है:
- The Hindu Israel election commission rejects Benjamin Netanyahu charges of fraud
- Al Jazeera Israel vote results confirmed as election commission rejects fraud claims | Israel Election 2026 News | Al JazeeraplayShow navigation menuplaysearchcaret-leftcaret-rightListenshare-nodesfacebookxwhatsapp-strokecopylinkgoogleinfoaj-logoaj-logoaj-logofacebooktwitteryoutubeinstagram-colored-outlinerssblueskytiktok-colored-outline


