शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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नोवाया गज़ेता बंद, क्रेमलिन के दबाव को ठहराया जिम्मेदार

रूस के प्रमुख स्वतंत्र अख़बार का कहना है कि राज्य के दबाव ने उसे “ख़त्म” कर दिया, और इसके साथ क्रेमलिन की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के तीन दशक का अंत हो गया।

मॉस्को में मेज़ों के बगल में डिब्बे पैक किए जा रहे हैं और न्यूज़रूम लगभग ख़ाली है।
शाम ढलते समय मॉस्को का एक न्यूज़रूम; अख़बार के बंद होने की घोषणा के बाद स्टाफ़ सामान समेट रहा था। चित्रण।

— रूस का प्रमुख स्वतंत्र अख़बार नोवाया गज़ेता ने शुक्रवार को घोषणा की कि वह बंद हो रहा है। उसका कहना है कि राज्य के दबाव ने उसे “मार” दिया है। यह दमन उन पत्रकारों के ख़िलाफ़ वर्षों से चल रहा है जिनकी रिपोर्टिंग में क्रेमलिन और यूक्रेन में उसके युद्ध की आलोचना होती थी।

द हिंदू के शब्दों में, रूस के हमले की खुलकर आलोचना करने वाले कुछ आख़िरी आउटलेट्स में से एक इस अख़बार का बंद होना असंतोष के ख़िलाफ़ अभियान में एक नए निचले स्तर को दर्शाता है। यह अभियान 2022 में मॉस्को द्वारा अपने पड़ोसी देश में सेना भेजने के बाद तेज़ हुआ। तब से अख़बार का मीडिया लाइसेंस रद्द हो चुका है, उसे “विदेशी एजेंट” का लेबल दिया गया है, और उसके पत्रकारों व संपादकों से पूछताछ हुई, कुछ को हिरासत में लिया गया और उनके घरों की तलाशी ली गई।

प्रधान संपादक सर्गेई सोकोलोव ने शुक्रवार सुबह यूट्यूब पर प्रकाशित एक वीडियो में बंद होने की घोषणा की। “लगभग 5 वर्ष के युद्ध के दौरान हम खुफ़िया एजेंसियों से पूरी तरह घिरे रहते हुए काम चलाने में सफल रहे। लेकिन अब बस। हम एक ‘किल ज़ोन’ में पहुँच गए हैं,” उन्होंने कहा, और यह भी जोड़ा कि अंतिम अंक फिर भी प्रकाशित होगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने संपादकीय टीम को अपना काम बंद करने पर मजबूर किया।

अख़बार के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता संस्थापक दिमित्री मुराटोव, जिन्होंने 2021 का पुरस्कार साझा किया था, ने AFP से कहा कि यह बंद होना “रूसी संघ द्वारा छेड़े गए एक विशाल सैन्य अभियान का हिस्सा” है। पुरस्कार मिलने के 2 वर्ष बाद मुराटोव को प्रधान संपादक का पद छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा, जब उन्हें खुद “विदेशी एजेंट” घोषित कर दिया गया था।

1993 में सोवियत संघ के विघटन के बाद स्थापित — मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा दान किए गए नोबेल धन से मिली शुरुआती मदद के साथ — नोवाया गज़ेता ने मानवाधिकार उल्लंघनों के दस्तावेज़ीकरण के लिए प्रतिष्ठा बनाई। इसके कई रिपोर्टरों की हत्या कर दी गई, जिनमें से ज़्यादातर को उनके काम का बदला माना गया। इनमें अन्ना पोलितकोवस्काया भी शामिल हैं, जो चेचन्या में रूसी सेना द्वारा कथित उल्लंघनों की जाँच कर रही थीं और अक्टूबर 2006 में अपनी इमारत के फ़्लैट में मृत पाई गई थीं।

हाल के महीनों में दबाव और बढ़ा है: अधिकारियों ने सोकोलोव के घर की तलाशी ली, और इस साल की शुरुआत में पत्रकार ओलेग रोल्डुगिन को गिरफ़्तार किया, जिन पर कंप्यूटरीकृत सूचना तक अवैध पहुँच का आरोप है। सरकारी मीडिया के अनुसार उन्होंने दोषी होने से इनकार किया है और मुकदमे तक वे नज़रबंद हैं। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के प्रमुख थिबो ब्रुटिन ने कहा कि यह अख़बार “स्वतंत्र, बहुलवादी, निष्पक्ष और कठोर पत्रकारिता का प्रतीक बना रहेगा”, और उन्होंने मॉस्को से उस कथित न्यायिक उत्पीड़न को ख़त्म करने की माँग की जिसे समूह ने इस रूप में परिभाषित किया है।

युद्ध शुरू होने के बाद अख़बार ने रूस के भीतर अपना प्रिंट उत्पादन पहले ही बंद कर दिया था, हालाँकि अदालती आदेशों के बावजूद उसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध रहा। अगले संकेत अंतिम अंक का प्रकाशन और रोल्डुगिन की सुनवाई की तारीख़ होंगे — यह देखने की अब तक की सबसे स्पष्ट परीक्षा कि रूस के भीतर स्वतंत्र रिपोर्टिंग के लिए कोई जगह बची है या नहीं।

स्रोत

यह लेख इन रिपोर्टों पर आधारित है:

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